Tuesday, February 28, 2012
Monday, February 27, 2012
अरविन्द केजरीवाल के बयां पर बवाल क्यूँ ? कितना सही है उनका ये बयां ? खैर ........... हमारे समाज में एक वर्ग ऐसा भी है जो सिर्फ बयां बजी या यू कहे बाल की खाल निकालने वाले लोग ये कही और से नहीं पैदा हुए हमारे ही बीच में रहेते और बयान करते रहे है ...................उस लिस्ट में सब से ऊपर एक ही नाम है और आप सभी उस सक्स को जानते है | सही समझा आप ने कोई और नहीं हमारे दिग्गी राजा फेसबुक की दुनिया में आप को कई नामो से संबोधन किया जाता है | वैसे अरविन्द ने जो कहा उसमे गलत ही क्या है , उनसे सिर्फ एक गलती हो गई | भाई गलती और बहोत बड़ी गलती आप गधे को गधा कहेंगे तो गधे को बुरा तो लगे गा ना और उन गधो की कौम को तो बहोत बुरा लगेगा आखिर बिरादरी की इज्जत की बात जो है | अब आप खुद ही देख लिजीये सरे गधे कैसे एक ही सुर में बोल रहे है | एक और बात बड़ी मजे की है अरविन्द जी आप ने शांति से चल रहे गधो की दौड़ में ब्रेक लगा दिया | इस देश में चोर को चोर कहे ना और बलात्कारी को बलात्कारी कहे ना गुनाह है क्या ?
आपका
विजय वर्मा
Tuesday, February 21, 2012
साथियों जैसा के आप जानते है आज हमारा देश भ्रस्टाचार , गरीबी , महेंगाई , विकाश जैसे कई समस्याओ से जूझ रही है ऐसे में हम सभी एक बडे बदलाव की उम्मीद मन में पाले है कोई आये और इन सारी समस्यों ख़तम कर दे , कास की ऐसा कोई चमत्कार हो जीससे देश की ये तस्वीर एक दम बदल जाये l देश की जनता और आम आदमी की आशा पूरी तरह ख़त्म हो गई है l सबसे जयादा निराशा हमे हमारे देश के नेताओ से हुए है जो जनता द्वारा चुने जाने के बाद जनता को भूल जाते है l राजनीती आज एक व्यवसाय बन गई है और इस व्यवसाय ने देश और जानता दोनों को खोखला कर दिया है l इस खोखलेपन को ख़त्म करने के लिए हमे कुछ ऐसा करना होगा जो देश का इतिहास बन जाये l कुछ ऐसे तरीके अख्तियार करने होंगे जो बहोत कठिन होंगे लेकिन देशहित में बड़ा कदम साबित होंगे l मैं इन सारी समस्याओ से बहुत दुखी हु अपने देश और देश वासियों के लिए कुछ बड़ा और अदभुद करना चाहता हु जो हिंदुस्तान के इतिहास में दर्ज हो जाये l इन सारी समस्यों को ख़त्म करने के लिए मैंने एक योजना बनाया है जो मेरे हिसाब से बहोत कारगर साबित होगा ये मेरे १३ वर्ष के अनुभव का सबसे बेहतरीन योजना होगा l इसे समझने/जानने और सुझाव के लिए आने वाले कुछ ही दिनों के अन्दर जल्द ही आप के सामने पूरी इमांदरी से रखूँगा l
आपका
विजय वर्मा
9837422244
Monday, February 13, 2012
प्रिय साथियों , आज हम सभी अपने परिवार और और उनकी जरूरतों के लिए क्या कुछ नहीं कर रहे है हम ये सोचते और चाहते है की दुनिया की सभी अच्छी-अच्छी चीज़े हमारे पास हो , ऐसा सोचन और चाहना कोई गलत नही है आखिरकर हमारे परिवार के प्रति कोई जेम्मेदारी भी तो है हमे एक बेटे , पिता , पति फ़र्ज़ पूरा करना है यहाँ तक तो बात समझ में आती है पर आज हमने इससे और भी कहे आगे सोचने की जरुरत है l जब हम कभी छुट्टी पर जाने की सोचते है तो कल्पना अक्सर एक सुन्दर स्थान की करते है और वो भी अपने गाँव , शहर या देश से कही दूर विदेश की क्यूँ ? इसका जवाब बहोत ही आसान है क्यूँकी हमारे आसपास में ऐसे स्थान है ही नहीं और अगर है भी तो ठीक नहीं है , चलिये ham अपने बात की सुरुवात करते है इन्ही तीन विषयो से गाँव / शहर / विदेश
गाँव :- आज आप ham जब भी किसे गाँव के व्यक्ति से मिलते है और उससे उसकी eccha के बारे में पूछते है तो वो शहर में बसने की बाते करता है क्यूँकी शहर में वो सारी सुविधाए है जो गाँव में नहीं है और शहर में बसने के चक्कर में वो अपना काफी सारा पैसा जमीन खरीदने और शहर लाइफ स्टाइल अपनाने में खर्च कर देता है, जिसका सबसे बड़ा असर ये हुवा की शहर की जमीनों की कीमत आसमान छूने लगी जीससे दलालों की मौज आ गयी और शहर के लोगो का हाल बुरा होने लगा खैर................. ये तो अभी सच्चाई का सिर्फ एक पहेलु है l
गाँव :- आज आप ham जब भी किसे गाँव के व्यक्ति से मिलते है और उससे उसकी eccha के बारे में पूछते है तो वो शहर में बसने की बाते करता है क्यूँकी शहर में वो सारी सुविधाए है जो गाँव में नहीं है और शहर में बसने के चक्कर में वो अपना काफी सारा पैसा जमीन खरीदने और शहर लाइफ स्टाइल अपनाने में खर्च कर देता है, जिसका सबसे बड़ा असर ये हुवा की शहर की जमीनों की कीमत आसमान छूने लगी जीससे दलालों की मौज आ गयी और शहर के लोगो का हाल बुरा होने लगा खैर................. ये तो अभी सच्चाई का सिर्फ एक पहेलु है l
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