Monday, March 12, 2012

IPS  नरेन्द्र कुमार को सरधांजलि स्वरोप कैंडल मार्च दिनांक १४/०३/२०१२ साम ५:३० उत्तर प्रदेश  के सभी जिलो में एक साथ

Tuesday, February 28, 2012

Arvind Kejriwal's Statement on Criminalization of Politics

मैंने कल ग्रेटर नॉएडा में राजनीति के अपराधीकरण के बारे में कुछ बोला था. जिसके खिलाफ आज लगभग सभी राजनीतीक पार्टियों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. मैने कुछ गलत नहीं बोला था और मैं अपने बयान पर कायम हूं. 

मौजूदा संसद में लगभग एक तिहाई यानि १६२ सांसद ऐसे हैं जिनके खिलाफ आपराधिक मामलें दर्ज हैं. इनमें से १४ सांसदों खिलाफ हत्या के मामलें दर्ज हैं. २० सांसदों के खिलाफ हत्या करने कि कोशिश के मामलें दर्ज हैं, ११ सांसदों के खिलाफ चारसौबीसी और ठगी के मामलें दर्ज हैं, १३ सांसदों के खिलाफ अपहरण के मामलें दर्ज हैं. उत्तर प्रदेश में चल रहे चुनावों में 5 प्रत्याशी ऐसे हैं जिनके ऊपर बलात्कार के आरोप हैं. मौजूदा संसद में भ्रष्टाचार के आरोप तो ढेरों सांसदों के खिलाफ लगे हैं, जैसे कनिमोझी, राजा, कलमाड़ी, लालू प्रसाद यादव, मुलायम सिंह इत्यादि. अगर सीबीआई स्वतंत्र एजेंसी होती तो चिदम्बरम भी भ्रष्टाचार का मुक़दमा झेल रहे होते. क्या ऐसी संसद इस देश को भ्रष्टाचार और अपराध से मुक्ति दिला सकती है. आज अगर कोई हत्या बलात्कार करे तो उस मामले में फैसला आने में लगभग २५-३० साल लग जाते हैं क्यों? क्यूंकि संसद में बैठे हुए वो सांसद जिनके ऊपर हत्या फिरौती आदि के आरोप हैं वो कभी नही चाहेंगे कि व्यवस्था बदले. और ऐसे मामलें जल्द से जल्द निपटें. क्या हम इस संसद से उम्मीद कर सकते हैं कि वह एक ऐसा जन लोकपाल बिल पारित करेगी कि भ्रष्टाचारी लोग एक साल के अन्दर जेल जाएँ, उनकी सम्पति जप्त हो और उन्हें संसद से बर्खास्त किया जाये. जब तक  कनिमोझी, राजा, कलमाड़ी, लालू प्रसाद यादव, मुलायम सिंह जैसे सांसद संसद में हैं तब तक संसद में एक शक्त जन लोकप्ल बिल पास नही हो सकता. क्यूंकि अगर शक्त जन लोकपाल बिल और शक्त न्याय व्यवस्था इस देश में लागु होती है तो १६२ सांसदों को जेल होने कि संभावना बनती है.

संसद और विधानसभाएं हमारे लोकतंत्र कि पवित्र मंदिर हैं. इन मंदिरों को ऐसे लोगों ने दूषित किया है. विधानसभा में बैठ कर इनमे से कुछ लोग ब्लू फिल्म देखते हैं. और हम इस पर प्रश्न उठायें और इसकी आलोचना करें तो हम पर आरोप लगाया जाता है कि हमें संसद पर विश्वाश नही है. कैसे विश्वाश करें? क्या अन्धविश्वाश करें? क्या हम यह विश्वाश करें कि हत्यारे, अपहरण करने वाले, भ्रष्टाचारी, ब्लू फिल्म देखने वाले इस देश को गरीबी, भुखमरी, अत्याचार और अन्याय से मुक्ति दिलाएंगे?

एक बात तो साफ है जब तक संसद और विधानसभा का चरित्र नही बदलेगा तब तक जन लोकपाल कानून नही आएगा, तब तक अपराध दूर नही होगा, तब तक महंगाई दूर नही होगी. 

अपराधियों के अलावा कई ऐसे करोडपति भी इस संसद में हैं जिनके पास करोड़ों रूपये मेहनत से नही बल्कि आम आदमी को चूसने से आये हैं. आज विजय माल्या जैसे लोग सांसद हैं जिनका मकसद जनता कि सेवा करना नहीं बल्कि अपनी डूबती एयरलाइन्स को बचाना हैं. ऐसे लोगों से हम कैसे अपेक्षा करें कि ये जनता के हित कि बात करेंगे या अपनी सम्पति बढ़ने के लीए काम करेंगे. ऐसे सब लोग मिलकर संसद का जमकर दुरूपयोग कर रहे हैं. ऐसा नही है कि संसद में अच्छे सदस्य नही हैं लेकिन अच्छे सदस्यों कि संख्या कम है. वे सब बेवश हैं क्योंकि संसद भ्रष्टाचारियों, मुनाफाखोरों और अपराधियों के गिरफ्त में फंस गई है. संसद और विधानसभावों को ऐसे लोगों के गिरफ्त से छुड़ाना होगा, इस देश को फिर से आजाद करना होगा. इस देश में जनतंत्र को स्थापित करना होगा. इसके लीए सम्पूर्ण व्यवस्था परिवर्तन करनी होगी. तभी जन लोकपाल बिल आएगा. तभी इस देश को भ्रष्टाचार, अपराध और अन्याय से मुक्ति मिलेगी.

२०१४ का आम चुनाव आन्दोलन होगा, एक क्रांति होगा. जो देश को सम्पूर्ण व्यवस्था परिवर्तन कि दिशा में ले जाएगी.