साथियों जल्द ही उत्तर प्रदेश के पुराने IAC साथियों की बैठक बुलाई जाएगी आप सभी से अनुरोद है की सभी पुराने साथियों का फ़ोन नंबर ऑनलाइन कर दिया गया है | उन से संपर्क कर हमे अपडेट करे
और किसे भी तरह की सिकायत या सुझाव के लिए पोस्ट करे या कॉल करे
धन्यवाद्
nice work...bt one mistake is der...in d UP list...der are names of all co-ordinators of india...u shud edit and display only the names of U.P. people...
ReplyDeletethax. for reply we know that the work is going on this issue we are traying build a iacnational.blog where all people of iac can talk n post
Deleteplz. forwerd to other iac poeple this site
विजय वर्मा ,
ReplyDeleteइस साईट के माध्यम सी सभी पुराने साथियो को नमस्कार
भ्रष्टाचार के विरोध में हमारी लड़ाई पूर्ववत चलती रहेगी
हम अन्ना की मुहीम के साथ भी है
कुछ दिगभ्रमित व्यक्ति अपनी कुत्सित हरकतों से इस मुहीम में पलीता लगाने की चेष्टा कर रहे है
भगवान उनको और उनकी आत्मा को शान्ति प्रदान करे
BIMAL KUMAR KHEMANI,
TRAP group of RTI activists
ALIGARH (U.P.)
Mob:09359724625
बिमल जी आप को और आप के जज्बे को सलाम आप हमारे iac के पुराने साथी , जैसा की आप को मालूम है की कुछ चला आयर मतलब परस्त लोग iac up को बर्बाद करने और एक दुब्लिकेते इअक तैयार करने की तैयारी में है | ऐसा सिर्फ इस लिए हो रहा है की हम सब एक नहीं है | इया साईट को तैयार करने का मकसद ही यही है की सभी उत्तर प्रदेश के iac साथी आपस में जुडे रहे और एक दुसरे के समस्या और जरुरत पर साथ खडे रहे सके | आप हमारे साथ आये आपका और आपके अलीगढ iac टीम का आभार
ReplyDeleteआपका साथी
विजय वर्मा
सभी उत्तर प्रदेश के IAC साथियों को जय हिंद प्रिय साथियों जैसा की आप सभी जानते है की अन्ना के इस आन्दोलन में उत्तर प्रदेश का सिर्फ इस्तेमाल हुआ है | हम सभी को सिर्फ एक डमी की तरह इस्तेमाल किया गया है और आगे भी ऐसा ही करने कि तैयारी है , जिसको रोकने की लिए इस प्रयास को किया जा रहा है | सभी लोगो की एक सिकायत बहोत आम रही की सिर्फ आन्दोलन या जरुरत पडने पर ही सेंट्रल IAC हम को याद करता है उसके बाद वो हमे भूल जाते है | दूसरी सिकायत थी COMMUNICATION गैप की कभी कोई इस्पशत दिशा निर्देश का ना मिलाना | जिसके फल स्वरुप हमारे बहोत सारे पुराने साथी या तो निरास हो गए या आन्दोलन से अपने आप को अलग कर लिया | आप सभी को मैं एक बात याद दिलाना चाहता हु की हमारा आन्दोलन जनलोक पाल का था ना की कुछ और मेरा आन्दोलन आज भी जनलोक पाल बिल का ही है | तो आये अपने पुराने संकल्प को एक बार फिर से दोहराए और अपने अंतर आत्मा की आवाज सुने और फिर से एक हो आन्दोलन को मजबूत बनाये |
ReplyDeleteआपका साथी
विजय वर्मा
एक लड़ाई जिसे हमें किसी भी हाल में नहीं हारनी चाहिए
ReplyDeleteअगर हम एक बार अन्ना हजारे को और जनलोकपाल को एककिनार करते हुए विचार करे कि आखिर वो कौन से ऐसे मुद्दे हैं जिनको लेकर देश की सरकार और आम नागरिको में एक जैसी जंग छिड़ी हुई है. अब निर्णय करने का समय आ
गया है कि हम कहा खड़े होना चाहते है.
भ्रष्टाचार केवल अन्ना हजारे या बाबा रामदेव का ही नहीं बल्कि देश के हर आम
आदमी का साझा दुश्मन है I
पहला प्रश्न :
• क्या आप भ्रष्टाचार और घूसखोरी से त्रस्त है?
• अगर “हैं” तो क्या आप इसका समाधान चाहते है?
अगर आपका उत्तर दोनों में हाँ है तो क्या आप सोचते है कि इसका समाधान किसी भी ऐसी संस्था से हो सकता है जो स्वायत (स्वतंत्र) नहीं है? या एक भ्रष्ट सरकार अपने आप अपने मातहतो के साथ इसे दूर कर सकेगी? अगर इस पर आपका उत्तर “ना” में है तो, फिर हमें एक ऐसी स्वायत संस्था का गठन करना होगा जो भ्रष्टाचार से निपट सके. अगर आप इससे सहमत हैं तो फिर अन्ना की मांग गलत कैसे हो सकती है कि एक लोकपाल बनना चाहिए जो स्वतंत्र रूप से बिना किसी सरकारी दबाव के काम कर सके और जिसके कामो में कोई भी
गठजोड या समझोता न हो I
लड़ाई चार बिन्दुओ पर है-
ReplyDeleteपहला : क्या हमारा प्रधानमंत्री लोकपाल के दायरे में लाया जाना चाहिए? प्रायः सभी की सोच है कि ऐसा होना चाहिए क्योंकि एक ईमानदार व्यक्ति को इसकी परवाह भी नहीं होगी किन्तु एक बेईमान की तो निगरानी रखनी ही पड़ेगी अन्यथा
बोफोर्स जैसे कांड होते ही रहेंगे और उन्हें कभी सुलझाया ही नहीं जा सकेगा I
दूसरा : क्या हमारे सांसद लोकपाल के दायरे में लाये जाने चाहिए?
शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो यह सोचता हो की हमारे सांसद इतने ईमानदार है कि उन्हें किसी भी निगरानी की आवश्यकता ही नहीं है. अगर इस पर जनमत संग्रह करवाया जाय तो इस प्रश्न पर अन्ना को शत प्रतिशत मत प्राप्त होंगे. आप सभी जानते है कि आज हमारे देश की राजनीति और राजनेताओं कि क्या स्थिति है.
तीसरा : क्या सभी स्तर के सरकारी कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में लाये
जाने चाहिए?
मेरा अनुमान तो ‘हाँ’ ही है क्योंकि हमारे रोजमर्रा के कार्यों में हम भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के कारण ही असुविधा और उत्पीडन झेलते हैं. जो जितना गरीब है उसकी प्रताडना उतनी अधिक है, इसीलिए प्रत्येक लोकसेवक एवम
सरकारी अधिकारी/कर्मचारी का लोक पाल के दायरे में आना आवश्यक है I
चौथा : क्या न्यायपालिका को भी लोकपाल के दायरे में आना चाहिए?
अगर कोई न्यायाधीश भ्रष्ट है तो उसकी शिकायत कहाँ दर्ज होगी और उसकी अनुमति कैसे मिले तो इसके लिए न्यायपालिका का भी लोकपाल के दायरे में आना आवश्यक है. जब लोकपाल प्रधानमंत्री, सांसदों और सरकारी कर्मचारियों के भ्रष्टाचार कि शिकायतें सुनेगा तो फिर न्यायाधीशों को इससे अलग करने का क्या
औचित्य है I
उक्त चारों व्यवस्थाओं के साथ इस बात पर भी विचार करने कि आवश्यकता है कि क्या सभी सरकारी कार्यालयों में सिटिजन चार्टर या नागरिक आचार संहिता जैसी कोई व्यवस्था होनी चाहिए जिससे स्पष्ट हो सके कि कौन सा अधिकारी कौन सा कार्य करेगा और कितने दिनों में? अगर कोई अधिकारी किसी काम को करने से मना करता है, या तय समय से ज्यादा टालमटोल करता है या रिश्वत की मांग करता है तो उसे दण्ड तो मिलना ही चाहिए? सरकार कहती है कि नागरिक आचार संहिता तो ठीक है किन्तु सरकारी नौकरों को सजा नहीं मिलनी चाहिए चाहे वो अपना काम न करे तो भी. अन्ना का कहना है कि अगर कोई सरकारी कर्मचारी तय समय सीमा में कार्यों का निष्पादन नहीं करते वो भ्रष्टाचार की श्रेणी में आना चाहिए और उसे उसी प्रकार की सजा मिलनी चाहिए जो ऊपर
बताई गई है, जाहिर है इस पर मेरे भारतवासी क्या कहेंगे I
क्या हमें सचमुच इन छोटी छोटी बातों पर भी जनमत संग्रह करने की
आवश्यकता है? गंभीरता पूर्वक हमें सोचना होगा I
प्रत्येक भारतीय अन्ना और उनकी टीम द्वारा बनाए गए लोकपाल का ही समर्थन करेगा जिसे इंटरनेट द्वारा हजारों देशवासियों की राय लेकर बनाया गया है.
हाँ ! कुछ डर भी स्वाभाविक है, जैसे कि कही ये लोकपाल एक और जिन्न साबित तो नहीं होगा जो वर्तमान व्यवस्था कहीं और ज्यादा दुरूह न हो जाये, किन्तु अन्ना की टीम ने इस पर भी गहन चिंतन करने के बाद ही एक ऐसी व्यवस्था का निर्माण किया जो काफी कठिन है, किन्तु इस के द्वारा हम अच्छे
लोगो का चयन कर सकते हैं I
अगर लोकपाल भी भ्रष्ट हो जाता है तो उसके लिए भी इसमे प्रावधान् किया गया
है कि कोई भी व्यक्ति लोकपाल के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में जाकर इस पर
न्याय मांग सकेगा I
तब फिर इस बिल पर इतना संदेह क्यूँ ? सरकार बार-बार अपने तेवर क्यों बदल रही है, और क्यों बार-बार जनता की आवाज को अनसुना किया जा रहा है ? अन्ना को इस मांग को लेकर बार बार भूख हडताल पर जाने को बाध्य होना पड़ रहा है कि देश में भ्रष्टाचार खत्म करो ? क्या ये प्रश्न सरकार के लिए डर और प्रतिष्ठा का मुद्दा तो नहीं बन गया है ? कोई भी मनुष्य सत्ता से बेदखल नहीं होना चाहता विशेषकर सरकार. ये सरकारी कर्मचारी और राजनीतिज्ञ तो अपने आप
को तानाशाह मानने लगे है , और लोकपाल से उन्हें डर है ?
न्यायिक सुधार , सिटिजन चार्टर के अतिरिक्त हमारे सामने अन्य समस्याए भी है जैसे चुनाव सुधार , कृषि क्षेत्र कि समस्या , आबादी कि समस्या , धर्म जाति कि समस्या आदि , परन्तु शुरुआत तो कही से करनी ही होगी I फिर पहला प्रहार भ्रष्टाचार से ही क्यों न किया जाय और इस दिशा में जन-
लोकपाल पर ही पूरा ध्यान केंद्रित कर शुरुआत हो I
हम सभी को ये भली भाति ज्ञात है कि शायद हम एक अति भ्रष्ट सरकार
और सरकारी तंत्र के साये में जी रहे है I
समय आ गया है हम इन सभी प्रश्नों के हल को तलाशते हुये एक स्वस्थ
भारत का निर्माण करे I
अगर आप मेरी बातो से सहमत है तो इस की ज्यादा से ज्यादा प्रतिया बना कर अधिक से अधिक लोगो तक यह बात पहुँचाए
सेवा में श्री मान एव श्रीमती महोदय श्री हमारे ग्राम पंचायत 31 एस एस डव्ल्यु पंचायत समिति हनुमानगढ़ rajasthan 31 एस एस डव्ल्यु के पंचायत भबन में कार्यरत सुरक्षा गार्ड रामकुमार मिरासी जिसकी डयूटी स्याम 5 बजे से लेकर सुबह 10 बजे तक है जो कभी अपनी अपनी डयूटी पर नहीं जाता बल्कि पंचायत के काम में दखल देता है कोई भी ग्रामीण पंचायत भबन में जाता है तो उनसे मनमाने ढंग से पैस आता है अगर ग्रामीण सिकायत करने की बात कहते है तो उनको धमकाता है की अगर किसीने ने मेरी सिकायत की तो मै मनरेगा बंद कर्वादुन्गा b.p.l कार्ड कटवादूंगा इसने ग्राम पंचायत में कार्यरत सभी कर्मचारीयों को अपने वश में कर रखा है जो इसके कहे अनुशार काम करते है सवच्छ सोचाल्य अभियान के तहत अगर कोई अपने घर पर सोचलल्य बनबता है तो ये कहता है की सोचाल्य की फोटो खीचना नाम लिखवाना ये सव कार्य मेरे द्वारा किया जाना ही अनिवार्य है एसा कहकर भ्रस्ताचार करता है सोचाल्य काम पूरा होजाने के बाद ये कहता है की अगर सोचाल्य का चैक प्राप्त करना चाहते हो तो मुझे 200 सो रुपये देने होंगे और जब चैक अधिकारी द्वारा लाभार्थी को दिया जाता है तो ये चैक देते हुए की फोटो खेंच कर 200 सो से 500 सो रुपये तक लेता है इस तरह रामकुमार ने गाँव में लूट मचा रखी है इसने अपने ही नियम कायदे बना रखे है इसके कारन हम सभी ग्राम वासी बहुत परेशान है ये किसी भी योजना की सुचना को ग्रामवासियों तक नहीं पहुँचने देता मनरेगा का काम इसने बंद करवा रखा है इसके खिलाप जल्द से जल्द कार्यवाही की जनि चाहिए मनरेगा का काम ठप होने के करन हम सभी ग्रामवासी बेरोजगारी के सीकार होगये है
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